मुझे मालुम नहीं कि आकर क्यू

मुझे मालुम नहीं कि आकर क्यू 
रोज निँदो से जगाता है मुझको 
मुसलसल साँसों में रहती 
जाने क्यू तेरी रवानगी है 

आइना देखता हूँ जब भी 
तेरा अक्स नज़र आता है मुझको 
तू ख़्याल है मेरा फितूर है 
या कि मेरी दीवानगी है 

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